Take Care Of Your Children Teeth In Hindi (Full Details)

(How to take care of your kids teeth in hindi), चेहरे की सुंदरता बढ़ने में दान्तों का भी बहुत महत्वा होता है। बच्चे प्रायः दान्तों की देख रेख के प्रति नादान होते हैं. माता पिता का फर्ज है कि बचपन में उनकी देख भाल में सहयोग करें और उन्हें साथ साथ प्रशिक्षित करे कि वे कैसे अपने दान्तों को सुरक्षित रख सकते हैं. कम उम्र में ही दांत ख़राब होने जैसे टेढ़ेपन, दांतों में संक्रमण का खतरा रहता है.

दांतों के टेढ़े मेढ़े होने के कारण बोल चाल के कुछ ऐसे शब्द होते है जिनके उच्चारण दांतों के सहारे होता है, तो अगर आपका दाँत सही नहीं है तो आपके बोल चल में रुकावट आ सकती है साथ ही खाना चबाने में भी परेशानी होती है साथ ही टेढ़े मेढ़े दांतों में खाना फंस जाए तो दांत सम्बन्धी अनेक बीमारियां भी हो सकती है इसलिए टेढ़े मेढ़े दांतों से छुट करा पाना जरूरी होता है इसीलिए बचपन में माँ बाप को अपने बच्चों का ख़याल रखना चाहिए।

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हमारी जिंदगी में अगर कुछ बदलाव आती है तो वो बचपन से आती है अगर आपको बचपन में ख़याल रखा गया तो आप बड़े होकर बहुत अच्छे दिखने लगेंगे खेर, आइये दोस्तों इस आर्टिकल के द्वारा जानते हैं कि बच्चों के छोटे दांतों का ख्याल कैसे रखें (Take Care Of Your Children Teeth In Hindi) ताकि हम सब अपने बच्चों का ख़याल रख सके तो इस आर्टिकल में जो भी बताया जाता है बस उसे धेयान से पढ़ना है।

Take Care Of Your Children Teeth In Hindi (Full Details)

दोस्तों हम सब जानते है की जब छोटे बच्चों का ख़याल नहीं रखते है तो बड़े होकर उन्हें बहुत से चीजों का सामना करना पड़ता है क्यूंकि अगर बच्चे को सही से परवरिश बचपन में किया जाये तो ये बहुत अच्छा रहता है और खास करके टेढ़े मेढ़े दांतों का निकलना यानी की अगर आप दाँतों का धेयान नहीं रखते है तो आपके बच्चों का दाँत टेढ़े निकल सकता है वैसे तो टेड़े दाँतों का कभी भी इलाज किया जा सकता है।

लेकिन इसका ईलाज जितना जल्दी हो उतना ही अच्छा रहता है क्योंकि कम उम्र में जब ड़ेमुलायम होते हैं जिससे परिणाम जल्दी और अच्छे मिलते हैं और सबसे जरुरी बात यह होता है की जब बचपन में दांत निकलता है तो वो सारा दाँत टूट जाता है ऐसे में अगर आप दाँतों को नहीं तोड़ते है तो आपका दाँत टेढ़ा निकलने लगता है जो काफी face को ख़राब कर देता है।

तो अगर आप बचपन में ही अपने बच्चों का ख़याल रखते है तो आपको कोई दिकत नहीं होगा और साथ ही आप अपने बच्चों को Brush जरूर करवाएं क्यूंकि बचपन में बच्चे लोग बरस नहीं करते है जिससे दाँतों में कीड़ा लग जाता है खेर निचे हम आपको पूरी जानकारी देंगे जिससे आपको हेल्प बहुत मिल जायेगा तो आये जानते है।

बच्चों के दांतों में टेढ़े पण क्यों और सावधानियां :-

दोस्तों अब हम आपको जो बताने जा रहा हूँ वो आपको सच में बहुत हेल्प करेगा क्यूंकि इसके अंदर में आपको बताऊंगा की अपने छोटे बच्चों का दाँतों का ख़याल कैसे रख सकते है यानी की छोटे बच्चों के दांतों की देखभाल कैसे करे (Take Care Of Your Children Teeth In Hindi) तो हम आपको निचे बता रहे है धेयान से पढ़ें।

 1  अक्सर कुछ बच्चों को अंगूठा चूसने और होंठ काटने की आदत होती हैं। इन आदतों की वजह से दांत टेढ़े मेढ़े हो जाते है. जब भी बच्चा मुंह में अंगूठा डाले या दांतों में जीभ लगाए तो उसकी इस आदतों को नोटिस करें तथा इन आदतों से छुटकारा दिलाएं।

 2  यदि बच्चा सोते समय मुंह खोल कर साँस लेता है तो उसकी इस आदत की वजह से ऊपर वाले दांत बड़े हो जाते हैं और बहार निकलने लगते है। ऐसे में माता पिता को ख्याल रखना चाहिए कि कहीं बच्चा मुंह खोल कर तो नहीं सो रहा है, और बच्चे इस आदत को दूर करने कि कोशिश करनी चाहिए।

 3  कुछ बच्चों के दूध के दांत टूटने के पहले ही पक्के दांत आने लग जाते हैं। जिसके कारण उनके दांत टेढ़े मेढ़े हो जा ते हैं ऐसे में बच्चों को डेंटिस्ट के पास लेजा कर उनके दूध के दांत को निकलवायें।

 4  कुछ लोगों का कहना है कि जब तक दूध के दांत पुरे नहीं गिर जातें तब तक किसी डेंटिस्ट के पास जा कर टेढ़े मेढ़े दांतों के बारे में बात करने से कोई फायदा नहीं है यह बिलकुल गलत है आप नियमित रूप से हर 6 महीने बाद बच्चों को डेंटिस्ट के पास ले जा कर दांतो कि जाँच करवाते रहें। जिससे कुछ प्रॉब्लम हो तो साथ – साथ ठीक हो जाए।

 5  दोस्तों आप अपने छोटे बच्चों को सूती कपड़े से मुंह साफ कर सकते है मेरा कहने का मतलब है की छोटे बच्चों का दांत के मसूडा बहुत कमजोर होती है जिसके कारण से आपको सूती कपड़ो से धेयान से साफ़ करना चाहिए जिससे बच्चे भी हल्का महसूस करेंगे और आपके बच्चे Healthy रहेंगे।

NOTE:- यदि आप टेढ़े मेढ़े दांतों का ईलाज कराया है तो उसे ऐसे न छोड़ दे, बल्कि ईलाज खत्म होने के बाद भी कुछ समय तक डॉक्टर से सलाह लेते रहे क्योंकि ईलाज के बाद भी दांत के सरकने तथा टेढ़े मेढ़े होने का संभावना बनी रहती है।

बच्चों के दांतों में संक्रमण क्यों:-

बच्चों में दांतों के संक्रमण कि सम्भावना ज्यादा होती है। दांतों में संक्रमण कि समस्या सिर्फ बड़ों में नहीं बल्कि छोटे बच्चों में भी हो सकती है ये संक्रमण उस तरह न दिखे, जैसे बड़ों में दिखता है, परन्तु दांतों में दर्द, पानी पिने में तकलीफ, कैबिटीस, दाँतों में सड़न आदि दांतों में होने वाले संक्रमण का ही रूप है।

दरअसल बच्चे मीठा खाना बहुत पसंद करते हैं इनमें से बहुत सारी चीजें जैसे – टॉफी, बिस्किट, चुइंगम आदि दांतो में चिपके रह जाने के कारण ये चीजें संक्रमण का कारण बनती है। आइये जानते हैं बच्चों के दांतों में संक्रमण के लक्षण और उसके उपचार बहुत सारी है तो आये जानते है इसके बारे में पूरी जानकारी।

बच्चों के दांतों में संक्रमण के लक्षण (Symptoms of Tooth Infection in Children)

दोस्तों हम सब जानते है की जब Infection होता है या फिर कीड़ा वगेरा लगता है तो उसका लक्षण दिखने लगता है तो में आपको कुछ ऐसा लक्षण बताऊंगा जिससे आप जान पाएंगे की Symptoms of tooth infection in children in hindi क्या होता है तो जो में आपको बताने जा रहा हूँ उसे आप धेयान से पढ़ें।

  1. दांत में दर्द होना.
  2. खाते समय दांतों में दर्द होना या पानी पिने और मीठा खाने में तकलीफ होना.
  3. मुंह से बदबू आना तथा मुंह से करवाहट घुली रहना.
  4. दांतों का भूरा या काला हो जाना.
  5. भूख न लगना और वजन तेजी से कम होना तथा बुखार आना.

NOTE:- इन सभी लक्षण के आधार पर आप बच्चों के दांतों में संक्रमण कि समस्या को पहचाना जा सकता है. संकरण होने पर बच्चों को जल्दी किसी डेंटिस्ट को दिखाएं.

बच्चों के दांतों में संक्रमण से कैसे करें बचाव:-

अब हम सब जानते है की दाँतों में बहुत से तकलीफे होती है और अगर दातों में जाएदा तकलीफ हो तो हमारा दिमाग पे बहुत असर पड़ता है क्यूंकि दाँतों का connection दिमाग से होता है और ये चीज आप खुद देखते होंगे की इसका असर बहुत जाएदा दिमाग पर पड़ता है इसीलिए हमेसा दातों का ख़याल रखना चाहिए तो आये जानते है इसकी पूरी जानकारी।

  1. बच्चों को रोज सुबह – शाम ब्रश करने की आदत डालें.
  2. कुछ भी खाने के बाद बच्चों को कुल्ला करने का आदत डालें.
  3. बच्चों को मीठी चीजें ज्यादा न खाने से रोके.
  4. बच्चों को हर समय खाने कि आदत है, तो इसे छुड़वाएं.

NOTE:- कई बार दूधकर दांतों में कीड़ा लगने या कमजोर होने से इसका संक्रमण उसके नीचे उगने वाले परमानेंट दांत में भी पहुंचने की आशंकार हती है. इसलिए कीड़ा लगने की समस्या होने पर दंतरोग विशेषज्ञ से सलाह लेकर दांत मेंफिलिंग करवाएं.

How to take care of children teeth

मुझे उम्मीद है दोस्तों की आपको ये article पढ़ने में काफी जायदा मज़ा आया होगा की (take care of your child teeth in hindi)(how to take care of your kids teeth in hindi) सारा कुछ मैंने बताने का पूरी कोसिस क्या है ताकि आपको हर एक चीज की जानकारी मिल सके इस article को पढ़ने के बाद।

मुझे हमेशा यही आशा रहता है की जो भी rahindi website पे आये उसको हर एक question का answer मिल सके तो मुझे आशा है की आपको सारा कुछ का answer दे दिया होगा लेकिन फिर भी आपको कोई doubt या question है इस पोस्ट के related तो आप मुझे पूछ सकते है में इसका reply जरूर दूंगा।

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