Essay on Swami Vivekananda in Hindi – स्वामी विवेकानंद पर निबंध

दोस्तों आज की इस आर्टिकल में हम आपको स्वामी विवेकानंद पर निबंध सरल भाषा में – Essay on Swami Vivekananda in Hindi के बारे में बताएंगे यानी की Swami Vivekananda par Nibandh kaise Likhe इसके बारे में पूरी जानकारी देंगे यानी की आपको Swami Vivekananda par 1200 words का essay मिलेगा इसलिए ये आर्टिकल पूरा धेयान से पूरा पढ़ना है। आपके लिए हेलफुल साबित होगी।

स्वामी विवेकानंद भारत के सबसे बड़े महापुरुष और धर्म गुरु है उन्होंने हमारी संस्कृति और हिंदू धर्म को पश्चिमी देशों को परिचित कराया आज पूरा विश्व योग दिवस मनाता है और योग को अपनी पहली प्राथमिकता के तौर पर करता है इस योग्य को परिचित भी स्वामी विवेकानंद ने ही पश्चिमी देशों को कराया स्वामी विवेकानंद युवाओं के नेता और मार्गदर्शक थे.

Essay on Swami Vivekananda in Hindi

उन्होंने देश की संस्कृति और देश के विकास के लिए अहम कदम उठाये और कार्य किए। स्वामी विवेकानंद हमारे देश की संस्कृति और वेदांत और आध्यात्मिक के महान ग्रुप है उन्होंने हमारे वेदांत और आध्यात्मिक ज्ञान को पश्चिमी देशों को परिचित कराया।

आज पूरा विश्व संस्कृति और हिंदू धर्म के वेदों और योग के मूल्य को जानता है और उन मूल्यों को पूरे विश्व में लाने का श्रेय स्वामी विवेकानंद को जाता है स्वामी विवेकानंद जी हमारे संस्कृति के प्रचार के लिए पूरे विश्व भर का भ्रमण किया और लोगों को हमारे संस्कृति का परिचय कराया।

Essay on Swami Vivekananda in Hindi – स्वामी विवेकानंद पर निबंध

19वीं सदी के अंत में हिंदू धर्म के प्रचार प्रसार और लोगों के आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास और चेतना को जगाने के लिए स्वामी विवेकानंद ने बहुत ही कार्य किए उन्होंने लोगों को जागरूक किया आज पूरा विश्व हिंदू धर्म और इसके रीति रिवाज को जानते हैं।

Swami Vivekananda रामकृष्ण मठ की स्थापना की जो आज भी कार्य कर रही है इस मठ में आज भी हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति का प्रचार किया जाता है आज भी मठ समाज कल्याण में जुड़े हुए हैं। स्वामी विवेकानंद ने मठ का नाम अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस के नाम पर रखा.

Swami Vivekananda युवाओं के रोल मॉडल हैं। युवाओं को आगे बढ़ने और युवाओं को अपने आत्मविश्वास के बल से परिचय कराया। स्वामी विवेकानंद ने हमारे युवाओं को राष्ट्रीयता का पाठ पढ़ाया और इसी के सहारे उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ मुहिम भी चलाएं। उन्होंने हमारे देश के लोगों को एक किया और अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ खड़ा किया।

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स्वामी विवेकानंद की जीवनी (Biography of swami vivekananda in Hindi)

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 में पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में हुआ था। उस वक्त कोलकाता ब्रिटिश इंडिया की राजधानी थी। स्वामी विवेकानंद जी का बचपन में नाम नरेंद्र दत्त था। उनके पिता का नाम विश्वनाथ दत्ता और उनके माता का नाम भुवनेश्वरी देवी था।

उनके पिता विश्वनाथ दत्ता कोलकाता हाईकोर्ट में कार्यरत उनकी माता एक आध्यात्मिक व्यक्तित्व वाले थे स्वामी विवेकानंद को अपनी शुरुआत में आध्यात्मिक ज्ञान अपने माता से ही मिले स्वामी विवेकानंद के दादाजी संस्कृत और फारसी के जानकार थे उन्होंने 25 साल की उम्र में अपने परिवार को छोड़कर सन्यासी जीवन को अपना लिया।

Swami Vivekananda को बचपन से ही आध्यात्मिक में बहुत ही उचित है वह भगवान श्री राम और हनुमान जी के तस्वीरों के सामने अध्यन करते रहते थे। इतना ही नहीं नरेंद्र दत्ता बहुत ही नटखट भी थे उनके माता-पिता को बचपन में  संभालना बहुत ही मुश्किल होता था इसीलिए मैंने भगवान शिव से पुत्र मांगा था पर उन्होंने मुझे एक शैतान दे दिया।

1871 में 8 साल की उम्र में उनका दाखिला ईश्वर चंद्र विद्यासागर के स्कूल में हुआ। यहां पर उन्होंने 6 साल तक पढ़ाई की इसके बाद उनका परिवार रायपुर चला गया 1879 में स्वामी विवेकानंद और उनके माता-पिता कोलकाता लौटे और उस वक्त स्वामी विवेकानंद पहले छात्र थे जिन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज के प्रवेश परीक्षा में फर्स्ट डिवीजन अंक लाए थे।

स्वामी विवेकानंद की पढ़ने की क्षमता बहुत ही अधिक थी वह एक बहुत ही अच्छे reader थे। नरेंद्र दत्त को भारतीय क्लासिक संगीत में रुचि थी। नरेंद्र दत्त को अध्यात्म धार्मिक इतिहास सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों में बहुत ही अधिक रूचि थी उन्हें हिंदू धर्म के वेदांत पुराण महाभारत उपनिषद में भी बहुत ही रुचि थी।

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उन्होंने अपनी स्नातक की पढ़ाई arts subject से की। उन्होंने पश्चिमी सभ्यता पश्चिम में अध्यात्म और यूरोपियन इतिहास को भी पढ़ा। नरेंद्र दत्त पढ़ने में बहुत ही अव्वल थे उनके याद रखने की क्षमता बहुत ही अधिक और उनके तेज पढ़ने की क्षमता अतुल्य थी।

Swami Vivekananda तब के धर्मगुरु रामकृष्ण परमहंस से बहुत ही प्रभावित हुए और उन्हें अपना गुरु माना। उन्होंने अपनी आध्यात्मिक और हिंदू समाज के ज्ञान को स्वर्गीय रामकृष्ण परमहंस से ही प्राप्त किया। उन्होंने अपनी पूरी जीवन को गुरु सेवा में लगा दिया।

आध्यात्मिक और इन सब चीजों से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने सन्यासी जीवन को अपनाया उनके गुरु का एक उद्देश्य था भगवान की सेवा मानवता की सेवा में है और स्वामी विवेकानंद ने इस उद्देश्य को अपनी जीवन भर पूरा किया।

स्वामी विवेकानंद ने एक ऐसे समाज की कल्पना की जिसमें किसी जाति लिंग के आधार पर भेदभाव ना हो जहां पर लोगों को एक अच्छी शिक्षा प्राप्त हो और लोगों के ऊपर अत्याचार ना हो इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने भारत में भ्रमण किया और लोगों को देश के प्रति जागरूक किया।

लोगों को एक दूसरे के प्रति जागरूक 4 देशवासियों को एक किया ताकि पूरा देश मिलकर अंग्रेजी साम्राज्य से लड़ सके और अपने आजादी को प्राप्त कर सकें।

उन्होंने सदा ही अपने जीवन में नारियों का सम्मान किया उन्होंने समाज में नारी पर हो रहे अत्याचार को कम करने के लिए बहुत ही अहम भूमिका निभाई उन्होंने लोगों को नारी के प्रति जागरूक कराया और नारियों को उनका सम्मान दिलाया।

एक बार की बात है जब स्वामी विवेकानंद कहीं विदेश में एक उपदेश दे रहे थे उनके स्पीच से विदेशी महिलाएं बहुत ही प्रभावित हुई उन्होंने स्वामी विवेकानंद से मिलने की इच्छा जताई जब यह स्त्रियां स्वामी विवेकानंद से मिली तब उन्होंने उनसे कहा जी आप बहुत ही गौरवशाली पुरुष हैं।

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स्वामी विवेकानंद से कहा आप हमसे शादी कर ले और तब हमें आपके जैसा पुत्र प्राप्त होगा तब स्वामी विवेकानंद ने हंसते हुए उत्तर दिया आप सभी तो जानते हैं कि मैं एक सन्यासी हूं भला मैं कैसे शादी कर सकता हूं अगर आपको मेरे जैसा पुत्र चाहिए तो आप मुझे अपना पुत्र बना ले इससे आप की भी इच्छा पूरी हो जाएगी और मेरा भी धर्म नहीं टूटेगा।

यह तो सुनते ही विदेशी महिलाएं Swami Vivekananda के चरणों में जा पड़ी और उन्होंने कहा आप धन्य है प्रभु आप एक ईश्वर के स्वरूप है आप किसी भी परिस्थिति में अपने धर्म को नहीं छोड़ सकते हैं।

अपने 30 वर्ष की छोटी से आयु में उन्होंने अमेरिका के शिकागो में हो रहे धर्म सम्मेलन में हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व किया और हिंदू धर्म से पश्चिमी देशों को परिचित कराया। उनकी ख्याति इतनी है कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने एक बार कहा था यदि आप भारत के बारे में जानना चाहते हैं तो स्वामी विवेकानंद को पढ़िए।

Swami Vivekananda भारत के लोगों को और देशवासियों को आवाहन दिया कि आओ साथ चल पड़े और इन दुराचारी अंग्रेजों से अपने देश को आजाद कराएं उन्हें कई शव वाहन का फल महात्मा गांधी के आजादी की लड़ाई में देखा इतना जनसैलाब स्वामी विवेकानंद के आह्वान के कारण आया स्वामी विवेकानंद अपने देश से बहुत अधिक प्रेम करते थे

उनका यह मानना था कि हमारे देश के युवा इस विश्व के सर्वश्रेष्ठ युवाओं में से एक है और हमारे देश के युवा ही हमारे देश की नींव रखेंगे इसीलिए स्वामी विवेकानंद को युवा का नेता भी कहा जाता है और आज हम उनके जन्मदिवस को युवा दिवस के तौर पर मनाते हैं हर साल हम 12 जनवरी को युवा दिवस के तौर पर स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि देते हैं।

 मृत्यु:  उन्होंने अपने जीवन काल में कभी भी पढ़ना नहीं छोड़ा वह हर वक्त दो-तीन घंटे पढ़ते ही रहते थे। 4 जुलाई 1902 में अपने पढाई करते वक्त ही उन्होंने महासमाधि ली। उनका अंतिम संस्कार बेलूर मठ में किया गया। उनकी अंत्येष्टि चंदन की लकड़ी से बेलूर मठ वेट किया गया ठीक गंगा नदी के दूसरे तट में 16 वर्ष पूर्व रामकृष्ण परमहंस का अंतिम संस्कार हुआ था।

उनका जीवनकाल पूरी तरह से देश को समर्पित और सामाजिक और हिंदू धर्म को समर्पित था आज हमें स्वामी विवेकानंद के रास्तों पर चलना चाहिए अगर हम सफल होना चाहते हैं तो हमें स्वामी विवेकानंद के दिखाए गए रास्तों में चलना चाहिए इन्होंने समाज को एक आईना दिखाया और नए समाज की परिकल्पना की और इस परिकल्पना को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने जीवन भर कार्य किया।

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मुझे उम्मीद है की स्वामी विवेकानंद पर निबंध सरल भाषा में – Essay on Swami Vivekananda in Hindi के बारे में आपको पूरी जानकारी मिली होगी और साथ ही Swami Vivekananda par Nibandh kaise Likhe इसके बारे में भी खेर अगर आपको अच्छा लगा हो तो अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें।

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